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कालसर्प दोष

कालसर्प दोष
Vedant
8 Jun 2026 | By Vedant | 2 min read
कालसर्प दोष वैदिक ज्योतिष का एक चर्चित योग है। यह तब बनता है जब जन्म कुंडली के सभी सात ग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि) राहु और केतु के बीच एक तरफ आ जाते हैं। राहु-केतु के अक्ष के बाहर कोई भी ग्रह न हो, तभी इसे कालसर्प योग/दोष माना जाता है। कालसर्प दोष क्यों बनता है? जब सभी ग्रह राहु और केतु के बीच फंस जाते हैं, तब व्यक्ति के जीवन पर राहु-केतु का प्रभाव बढ़ जाता है। इससे जीवन में संघर्ष, उतार-चढ़ाव, मानसिक दबाव और कार्यों में विलंब देखने को मिल सकता है। कालसर्प दोष कब भंग होता है? निम्न स्थितियों में इसका प्रभाव कम या समाप्त माना जाता है: यदि कोई ग्रह राहु-केतु की सीमा के बाहर हो। यदि राहु या केतु के साथ कोई शक्तिशाली शुभ ग्रह हो। गुरु की मजबूत दृष्टि राहु, केतु या लग्न पर हो। पंचमहापुरुष योग, गजकेसरी योग, राजयोग आदि मजबूत शुभ योग मौजूद हों। ग्रह उच्च, स्वगृही या बलवान हों। दशा-अंतरदशा में शुभ ग्रहों का प्रभाव मिले। कालसर्प दोष के संभावित प्रभाव कार्यों में बार-बार बाधा या देरी। मानसिक तनाव और अस्थिरता। करियर में संघर्ष के बाद सफलता। पारिवारिक या वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव। अचानक लाभ और अचानक हानि। आध्यात्मिकता एवं रहस्यमय विषयों में रुचि। ध्यान रहे कि हर कालसर्प योग अशुभ नहीं होता। अनेक सफल व्यक्तियों की कुंडली में भी यह योग पाया गया है। कालसर्प दोष के प्रमुख 12 प्रकार 1. अनंत कालसर्प योग – राहु प्रथम, केतु सप्तम भाव। 2. कुलिक कालसर्प योग – राहु द्वितीय, केतु अष्टम भाव। 3. वासुकी कालसर्प योग – राहु तृतीय, केतु नवम भाव। 4. शंखपाल कालसर्प योग – राहु चतुर्थ, केतु दशम भाव। 5. पद्म कालसर्प योग – राहु पंचम, केतु एकादश भाव। 6. महापद्म कालसर्प योग – राहु षष्ठ, केतु द्वादश भाव। 7. तक्षक कालसर्प योग – राहु सप्तम, केतु प्रथम भाव। 8. कर्कोटक कालसर्प योग – राहु अष्टम, केतु द्वितीय भाव। 9. शंखनाद कालसर्प योग – राहु नवम, केतु तृतीय भाव। 10. पातक कालसर्प योग – राहु दशम, केतु चतुर्थ भाव। 11. विषाक्त कालसर्प योग – राहु एकादश, केतु पंचम भाव। 12. शेषनाग कालसर्प योग – राहु द्वादश, केतु षष्ठ भाव। क्या कालसर्प दोष हमेशा बुरा होता है? नहीं। आधुनिक ज्योतिष में कई विद्वान इसे "दोष" से अधिक एक कर्मिक योग मानते हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि जीवन खराब होगा, बल्कि यह कि व्यक्ति को सामान्य से अधिक संघर्ष करके सफलता प्राप्त करनी पड़ सकती है। यदि कुंडली में मजबूत राजयोग, शुभ ग्रह और अच्छी दशाएं हों, तो कालसर्प योग का नकारात्मक प्रभाव काफी कम हो जाता है।

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