26 May 2026 | By Vedant | 1 min read गुरु चांडाल दोष तब बनता है जब जन्म कुंडली में गुरु ग्रह की राहु या केतु के साथ युति हो जाती है, विशेषकर जब यह युति निकट डिग्री में हो। गुरु ज्ञान, धर्म, सदाचार, विवेक और मार्गदर्शन का कारक माना जाता है, जबकि राहु भ्रम, मायाजाल, असामान्य सोच और नियमों को तोड़ने की प्रवृत्ति देता है। इसी कारण गुरु चांडाल दोष व्यक्ति के विचारों, निर्णयों और जीवन दृष्टि में असंतुलन ला सकता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति को शिक्षा, गुरु कृपा, विवाह, संतान, सम्मान या सही निर्णय लेने में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है, साथ ही कई बार गलत संगति, मानसिक भ्रम या आध्यात्मिक भटकाव भी देखने को मिलता है। हालांकि हर कुंडली में इसका प्रभाव समान नहीं होता, क्योंकि यह ग्रहों की स्थिति, राशि, भाव, दृष्टि और सम्पूर्ण कुंडली पर निर्भर करता है। यदि गुरु अपनी उच्च राशि, स्वराशि या मजबूत अवस्था में हो, शुभ ग्रहों की दृष्टि मिल रही हो, या नवांश एवं चलित कुंडली में यह दोष कमजोर अथवा भंग हो रहा हो, तो इसके नकारात्मक प्रभाव काफी कम हो जाते हैं। इसलिए केवल दोष देखकर भयभीत होने के बजाय सम्पूर्ण कुंडली का गहराई से विश्लेषण करना आवश्यक माना जाता है।