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मंगल दोष या मांगलिक योग

मंगल दोष या मांगलिक योग
Vedant
6 May 2026 | By Vedant | 1 min read
मंगल दोष (मांगलिक योग) को समझना ज्योतिष में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। जब मंगल ग्रह जन्म कुंडली के 1, 4, 7, 8 या 12 भाव में स्थित होता है, तब सामान्यतः व्यक्ति को मांगलिक कहा जाता है। ऐसे में मंगल का प्रभाव वैवाहिक जीवन पर विशेष रूप से देखा जाता है। यदि इन भावों में स्थित मंगल अपनी ही या उच्च राशि (मेष या वृश्चिक) में न हो, या 6, 8, 12 भाव का स्वामी बनकर बैठा हो, तो मंगल दोष का प्रभाव और अधिक प्रबल हो सकता है। ऐसी स्थिति में विवाह में देरी, वैवाहिक जीवन में तनाव, मतभेद या संघर्ष की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं। इसके अलावा, यदि यह मंगल दोष चलित कुंडली (Chalit Chart) और नवांश कुंडली (Navamsha Chart) में भी बना रहता है और उसका भंग (Cancellation) नहीं होता, तो इसके प्रभाव जीवन में अधिक स्पष्ट रूप से देखने को मिलते हैं। वहीं, यदि किसी भी स्तर पर मंगल दोष का भंग हो जाता है, चाहे वह दृष्टि, युति, या अन्य ज्योतिषीय योगों के कारण हो तो इसके नकारात्मक प्रभाव काफी हद तक कम हो जाते हैं, और वैवाहिक जीवन में संतुलन बना रहता है।

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